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भारतीय नौसेना का युद्धपोत तरकश कार्लस्क्रोना बंदरगाह पर पहुंचा

नौसेना का एक प्रमुख युद्धपोत आईएनएस तरकश आज स्वीडन के कार्लस्क्रोना बंदरगाह पर पहुंचा। 15 वर्षों से भी अधिक के अंतराल के बाद भारतीय नौसेना के किसी जहाज की स्वीडन के तटों की यह पहली यात्रा है। इस युद्धपोत की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान समुद्रों को सुरक्षित बनाने के साझा लक्ष्य का अनुपालन करते हुए दोनों देशों के बीच समुद्रीय सहयोग को बढ़ाने और मजबूत करने के लिए पेशेवर बातचीत, खेल और सामाजिक भागीदारी की योजना बनाई गई है। यह यात्रा मित्र देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों की स्थापना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए भारतीय नौसेना के मिशन का एक हिस्सा है। मौजूदा यात्रा मित्र देशों के साथ भारत की शान्तिपूर्ण उपस्थिति और एकजुटता को मजबूती प्रदान करती है। इस प्रकार भारत और स्वीडन समुद्रीय माहौल की बढ़ती हुई चुनौतियों से निपट सकते हैं। कैप्टन सतीश वासुदेव की कमान वाला आईएनएस तरकश नौसेना के एक अति आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट से लैस है। यह तीनों आयामों में खतरों से निपटने के लिए सक्षम हथियारों और सेंसर की बहुमुखी रेंज से भी लैस है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की पश्चिमी बेड़े का एक हिस्सा है जो पश्चिमी नौसेना कमान की फ्लैग ऑफिसर कमानडिंग-इन-चीफ की परिचालन कमान के अधीन है। भारत और स्वीडन ने कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय भ्रमण और वार्ताएं की हैं, जिनके परिणामस्वरूप व्यापक परिप्रेक्ष्य में संबंधों में तेजी से प्रगति हुई है। दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्री डकैती के विरुद्ध वैश्विक अभियानों में नियमित रूप से अपना योगदान कर रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के कार्यकारी निदेशक ने बिजली राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से भें

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के कार्यकारी निदेशक डॉ. फातेह बिरोल ने आज नई दिल्ली में बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री आर.के. सिंह से भेंट की। बैठक के दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा बैट्री और हाइड्रोजन भंडारण के विषय शामिल थे। डॉ. बिरोल ने सौभाग्य योजना के तहत ऊर्जा सुगमता और उजाला योजना के तहत ऊर्जा दक्षता के प्रयासों की सराहना की।

देश के समस्‍त टोल प्‍लाजा पर फास्‍ट टैग लेन्‍स को बढ़ावा

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस साल 01 दिसंबर से देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल फ्री प्लाजा पर समस्त लेन्स को “फास्ट टैग्स लेन्स” घोषित करने का फैसला किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के अनुसार टोल प्लाजा में फास्ट टैग लेन केवल फास्ट टैग उपयोगकर्ताओं की आवाजाही के लिए आरक्षित होती है। इस नियम के अंतर्गत एक ऐसा प्रावधान भी है, जिसके अंतर्गत गैर- फास्ट टैग उपयोगकर्ताओं द्वारा फास्ट टैग लेन्स से गुजरने पर उनसे दोहरा शुल्क वसूला जाता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भेजे पत्र में मंत्रालय ने प्राधिकरण से राष्ट्रीय राजमार्गों के प्रत्येक टोल प्लाजा पर उपरोक्त शुल्क नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा है। हालांकि प्रत्येक टोल प्लाजा पर ओवर डाइमेन्शनल अथवा बहुत बड़े आकार वाले वाहनों की सुगमता और निगरानी के लिए एक हाईब्रिड लेन की अनुमति होगी, जहां फास्ट टैग और भुगतान के अन्य माध्यम स्वीकार किए जाएंगे। यह लेन समयबद्ध रूप से फास्ट टैग लेन में परिवर्तित की जाएगी। उपरोक्त निर्णय डिजिटल माध्यम से शुल्क के त्वरित भुगतान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है ताकि वाहनों की सुचारू आवाजाही हो सके और टोल प्लाजा पर लगने वाले ट्रैफिक जाम को रोका जा सके। आरएफआईडी आधारित फास्ट टैग वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाए जाते हैं। यह टैग प्रीपेड अथवा सम्बद्ध बचत खाते से शुल्क के सीधे भुगतान की अनुमति देता है और वाहनों को लेनदेन के लिए रुके बगैर आगे बढ़ने में समर्थ बनाता है। हालांकि ऐसा पाया गया है कि वर्तमान में गैर-फास्ट टैग उपयोगकर्ता भी फास्ट टैग लेन्स से गुजरते हैं और नकद भुगतान करते हैं। इसकी वजह से फास्ट टैग लेन्स पर भीड़ होती है और प्लाजा पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है और इस प्रकार फास्ट टैग्स लगाने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप फास्ट टैग्स के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक टोल उगाही में वांछित वृद्धि नहीं हुई है। इस निर्णय के सुचारू कार्यान्वयन के लिए मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से देशभर में फास्ट टैग्स की समग्र आवश्यकता का आकलन करने और इन्हें आवश्यक संख्या में उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। 01 दिसंबर, 2019 से इसके कार्यान्वयन से पहले समस्त टोल प्लाजा पर आवश्यक नागरिक एवं इलेक्ट्रॉनिक अवसंरचना का प्रावधान किया जाएगा। प्राधिकरण से उन लॉजिस्टिक और अन्य समस्याओं की पहचान और समाधान करने को कहा गया है, जिनसे किसी भी तरह की कानून और व्यवस्था की समस्या हो सकती है।

श्री विवेक कुमार को प्रधानमंत्री का निजी सचिव नियुक्त

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने इस समय प्रधानमंत्री कार्यालय में निदेशक के पद पर कार्यरत श्री विवेक कुमार, आईएफएस (2004) को प्रधानमंत्री के निजी सचिव के पद पर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। उनका कार्यकाल कार्यभार संभालने की तिथि से होगा। उनकी नियुक्ति दोनों पद समाप्त होने या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, के आधार पर की गई है।

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